लोहिया
कालेज, चुरू, राजस्थान
मे ‘स्त्री-विमर्श
कल, आज और
कल’ विषय पर आयोजित दो दिवसीय संगोष्ठी का अनुभव बहुत प्यारा और उत्साहवर्धक रहा। प्यारा इसलिए कि जिस
तरह से सेमिनार के आयोजकों ने पूरी व्यवस्था की थी वह निसंदेह अपने आप में सम्पूर्ण थी। संगोष्ठी का आयोजन स्थल और बाहर से आए अतिथि विशेषज्ञों के आवास तथा भोजन आदि की समुचित व्यवस्था थी। आधुनिक सुविधाओं से सम्पन्न
होटल में ठहराने के साथ-साथ आयोजकों ने जिस तरह परंपरागत राजस्थानी शैली के भोजन की व्यवस्था की थी वह अवश्य ही सराहनीय था।
वैसे तो किसी प्रकार की कोई असुविधा संगोष्ठी के प्रबन्धकों ने होने नहीं दी लेकिन
यदि किंचित भी किसी को कुछ लगता तो डॉ उम्मेद सिंह, डॉ मंजु शर्मा और श्री दुलारम सहारन जी के साथ साथ उम्मेद जी के अन्य सभी सहयोगी प्राध्यापक
तथा छात्र मदद को हर क्षण तैयार रहते। किसी भी समस्या के लिए का स्वाद देखते ही बनाता
था। जहां तक उत्साहवर्धन की बात है तो दिल्ली से इतनी दूर स्त्री-विमर्श
जैसे मुद्दे पर अनेक विद्वान वक्ता और प्रतिभागियों के साथ-साथ पत्रकार, कार्यकर्ता और समाजसेवी सगठनों के प्रतिनिधि वहाँ पहुंचे यह अपने
आप में बहुत महत्वपूर्ण है। अनेक विदुषी रचनाकारों और विद्वान आलोचकों से दिल्ली से
बाहर चुरू में भेंट हुई। संगोष्ठी के दौरान और उससे बाहर भी प्रो. पुरुषोत्तम अग्रवाल, डॉ. नन्द भारद्वाज, प्रो. रामबक्ष, सुश्री मैत्रेयी पुष्पा, सुश्री मृदुला गर्ग, प्रो रोहिणी अग्रवाल, डॉ. अजय नावरिया, डा. सुमन
केसरी, डॉ. अल्पना मिश्रा, डॉ. गंगा सहाय मीणा, श्री दुलाराम सहारन, सुश्री
मनीषा पांडे, डॉ एम. दी. गोरा, डॉ उम्मेद गोठवाल, डॉ. मंजु शर्मा, डॉ अंजु ओझा, डॉ गीता सामोर, डॉ रणजीत
बुडानिया आदि के साथ बातचीत भूत सार्थक रही। संगोष्ठी का अनुशाशन, सत्तरों की व्यवस्था में समय का परिपालन, मीडिया प्रबंधन, अतिथियों और प्रतिभागियों की देख-भाल, खान-पान और सम्मान की दृष्टि से आयोजक
साधुवाद के अधिकारी है। उन्हें इस सफल आयोजन के लिए बहुत-बहुत बधाई,
Sunday, October 20, 2013
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