नजीर अकबराबादी ने हिंदी और उर्दू दोनों भाषाओँ में लिखा है. उन्होंने "कृष्णलीला संबंधी बहुत से पद्य खड़ी बोली हिंदी में लिखे". इन पद्यों का उल्लेख आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने अपनी पुस्तक 'हिंदी साहित्य का इतिहास' किया है. वे नजीर को एक 'मनमौजी सूफी भक्त' कहते है. आज कृष्ण-जन्माष्टमी है. कई साथियों ने नजीर अकबराबादी की कुछ नज्में उद्धृत की है. नजीर अकबराबादी की एक बेहद खूबसूरत नज़्म याद आई. मूल तो मुझे मिली नहीं, उनकी जो नज़्म शुक्ल जी ने उद्धृत की है, वह यहाँ प्रस्तुत है.
यारो सुनी य दधि के लुटैया का बालपन.
औ मधुपुरी नगर के बसैया का बालपन.
मोहन स्वरुप नृत्य करैया का बालपन.
बन-बन में ग्वाल गौवें चरैया का बालपन.
ऐसा था बांसुरी के बजैया का बालपन
क्या क्या कहूँ मैं कृष्ण कन्हैया का बालपन.
परदे में बालपन के ये उनके मिलाप थे.
जोती सरूप कहिये जिन्हें सो वो आप थे.
- नजीर अकबराबादी
यारो सुनी य दधि के लुटैया का बालपन.
औ मधुपुरी नगर के बसैया का बालपन.
मोहन स्वरुप नृत्य करैया का बालपन.
बन-बन में ग्वाल गौवें चरैया का बालपन.
ऐसा था बांसुरी के बजैया का बालपन
क्या क्या कहूँ मैं कृष्ण कन्हैया का बालपन.
परदे में बालपन के ये उनके मिलाप थे.
जोती सरूप कहिये जिन्हें सो वो आप थे.
- नजीर अकबराबादी
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