इस साल रक्षा-बंधन का त्यौहार सुना है रात में मनाया जा रहा है। मैंने अपने एक मित्र को फोन किया यह जानने के लिए कि आखिर इसका रहस्य क्या है? राखी भी क्या कोई रात के अंधेरे में मनाने की चीज़ है? अब तक तो दीपावली के बारे में ही सुना था। यह लगभग ग्यारह बजे के आसपास की बात है। साथी ने मेरी जिज्ञासा पर तो ध्यान नहीं दिया उल्टे चौंकते हुए बोला कि 'यह भी नही मालूम कि राखी कब है? टीवी चैनलों पर विद्वान लोग बार बार बता रहे हैं राखी के महत्व और उसे मनाए जाने की विधियों आदि के बारे में। किस दुनिया में रहते हो तुम? जामिया में पढ़ाते-पढ़ाते सभी परंपराएं और तीज-त्यौहारों का भी ध्यान नहीं रख पाते?' मैं तो चौंकने की हिम्मत भी नहीं जुटा पा रहा था। सोचने लगा कि विश्वविद्यालय अथवा पढ़ाने से राखी का क्या संबंध हो सकता है? फिर खुद को आश्वस्त करते हुए सोचने लगा कि साथी की मज़ाक की आदत है? छोड़ो।
मैंने पूछा कि तुम हो कहां? वह बोला कि 'और कहां होता, ट्रैफिक में फंसा हूं, धौला कुआं के आसपास। पत्नी अपने भाई को राखी बांधने द्वारका जा रही हैं। केवल सुबह सात बजे तक का समय दिया गया है बहनों को राखी बांधने के लिए, बस।' कुछ झुंझलाहट भरी मन:स्थिति में कहने लगा कि 'मेरे तीन साले यानी मेरी पत्नी के प्यारे तीन भाई शहर के तीन कोनो में रहते हैं जैसे दिल्ली की रखवाली की जिम्मेदारी इसी परिवार के कंधों पर है। क्या करूं? सभी के यहां जाना है। लगता है रात भर घूमता ही रहूंगा।' मैंने भी एक बार तो सोचा कि क्यों न मैं भी अपने घर की राखी की कुछ जिम्मेदारी -कम से कम शाहदरा की तरफ की- अपने इस साथी को थमा दूं। पर लगा कि यह कुछ ज़्यादती ही हो जाएगी। अत: साथी का हौसला बढ़ाना ही बेहतर समझा।
मैंने पूछा कि तुम हो कहां? वह बोला कि 'और कहां होता, ट्रैफिक में फंसा हूं, धौला कुआं के आसपास। पत्नी अपने भाई को राखी बांधने द्वारका जा रही हैं। केवल सुबह सात बजे तक का समय दिया गया है बहनों को राखी बांधने के लिए, बस।' कुछ झुंझलाहट भरी मन:स्थिति में कहने लगा कि 'मेरे तीन साले यानी मेरी पत्नी के प्यारे तीन भाई शहर के तीन कोनो में रहते हैं जैसे दिल्ली की रखवाली की जिम्मेदारी इसी परिवार के कंधों पर है। क्या करूं? सभी के यहां जाना है। लगता है रात भर घूमता ही रहूंगा।' मैंने भी एक बार तो सोचा कि क्यों न मैं भी अपने घर की राखी की कुछ जिम्मेदारी -कम से कम शाहदरा की तरफ की- अपने इस साथी को थमा दूं। पर लगा कि यह कुछ ज़्यादती ही हो जाएगी। अत: साथी का हौसला बढ़ाना ही बेहतर समझा।
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